अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा;
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा;
मरने की, अय दिल, और ही तदबीर कर, कि मैं;
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-का़तिल नहीं रहा;
वा कर दिए हैं शौक़ ने, बन्द-ए-नकाब-ए-हुस्न;
ग़ैर अज़ निगाह, अब कोई हाइल नहीं रहा;
बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर असद ;
जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वो दिल नहीं रहा।
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा;
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा;
मरने की, अय दिल, और ही तदबीर कर, कि मैं;
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-का़तिल नहीं रहा;
वा कर दिए हैं शौक़ ने, बन्द-ए-नकाब-ए-हुस्न;
ग़ैर अज़ निगाह, अब कोई हाइल नहीं रहा;
बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर असद ;
जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वो दिल नहीं रहा।
Tere Ishq Ki Intaha Chahta Hun;
Meri Sadgi Dekh Kya Chahta Hun;
Sitam Ho K Ho Wada-e-Behijabi;
Koi Bat Sabr-Azma Chahta Hun;
Ye Jannat Mubarak Rahe Zahidon Ko;
K Main Ap Ka Samna Chahta Hun;
Koi Dam Ka Mehman Hun Ai Ahl-e-Mahfil;
Chirag-e-Sahar Hun, Bujha Chahta Hun;
Bhari Bazm Mein Raz Ki Bat Kah Di;
Bara Be-Adab Hun, Saza Chahta Hun!
तुझको याद करके रोता है अब दीवाना तेरा;
जो ना भूल पाएगा कभी भी ठुकराना तेरा;
तुम हमें भूल जाओ शायद ये फितरत है तेरी;
मुश्किल है हमारे लिए प्यार भुलाना तेरा।
फुर्सत में करेंगे तुझसे हिसाब-ए-ज़िन्दगी;
अभी तो उलझे है खुद को सुलझाने में...
दिल ही दिल में हम तुमसे प्यार करते हैं;
हम ऐसे हैं जो मोहब्बत में जाँ निसार करते हैं;
निगाहें मिलाते हैं अक्सर लोगों से छुपाकर;
जैसे किसी गुनाह को यारो गुनाहगार करते हैं।